संजय मांजरेकर ने किया खुलासा, गांगुली और द्रविड बने सन्यास की वजह

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टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज और वर्तमान कमेंटेटर संजय मांजरेकर की आत्मकथा इन दिनों सुर्खियों में है। ‘संजय मांजरेकर इमपरफेक्ट’ नाम की इस किताब में मांजरेकर हमेशा की तरह बेबाक रुप से ब्यां किया हैं। संजय की क्रिकेट और खिलाड़ियों से जुड़ी टिप्पणियां हमेशा ही चर्चा में रही हैं। चाहे वह सचिन तेंदुलकर के संन्यास को लेकर हों या फिर हाल फिलहाल में टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के टी 20 में होने के सवाल पर। उन्होंने किताब में पुर्व क्रिकेटरों को लेकर कई खुलासे किए हैं। जिनमें कपिल देव से लेकर महेंन्द्र सिंह धोनी का भी जिक्र किया गया है।

संजय मांजरेकर ने अपने संन्यास को लेकर जो बात इस किताब में बताई है, उसके पीछे उन्होंने भारत के दो पुर्व कप्तान सौरभ गांगुली और राहुल द्रविड को जिम्मेदार ठहराया है।  मांजरेकर ने आत्मकथा इमपरफेक्ट’ में लिखा है कि उस समय टीम के महत्वपूर्ण बल्लेबाज थे और आउट ऑफ फॉर्म तो बिलकुल नहीं थे। मांजरेकर ने साथ ही लिखा कि 1996 इंग्लैंड दौरे पर द्रविड़ से तो लोगों को उम्मीद थी कि वे बढ़िया प्रदर्शन करेंगे लेकिन सौरव गांगुली  ने पहले ही टेस्ट मैच में शतक जड़ सबके लिए सरप्राइज रहे। संजय ने आगे कहा कि द्रविड़ तो लगता था कि टीम इंडिया के लिए ही बने हैं लेकिन जब मैंने दोनों खिलाड़ियो को  खेलते देखा और जिस तरह से उन्होंने बैटिंग की, तभी मुझे अंदाजा हो गया था कि अब मेरा ‘समय पूरा’ हो गया है।

गौरतलब है कि 90 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम में कई महान खिलाड़ियों का उदय हुआ था। लेकिन ये एक ऐसा समय भी रहा जब कई प्रतिभाशाली क्रिकेटर उन ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच पाए, जिनकी एक समय उनसे उम्मीद की जा रही थी। उनमें से एक थे संजय मांजरेकर रहें। मांजरेकर जब तक इंटरनेशल क्रिकेट खेले उनकी पहचान एक तकनीकी रूप से सक्षम खिलाड़ी के तौर पर रही। खासतौर पर उनका रिकॉर्ड विदेशी पिचों पर शानदार रहा। उनको उनकी तकनीक के लिए साथी खिलाड़ी उन्हें कई बार मि. पर्फेक्ट कहा करते थे। 1996 के बाद भारतीय टीम में जिस तरह एक साथ राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली का पदार्पण हुआ था, जिसकी वजह से संजय मांजरेकर के लिए टीम में ‘कम बैक’ करना मुश्किल हो गया था। 1996 में जब अचानक उन्होंने क्रिकेट से संन्यास लिया तो क्रिकेट जानकारों ने माना कि उनमें कम से कम तीन साल की क्रिकेट और बची थी।

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