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लाल धब्बा

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“अरे मनु बेटा आज स्कूल से जल्दी घर आ गई, क्या हुआ सब ठीक तो है ना”

हाँ मां पता नहीं क्यों पेट में दर्द हो रहा है, कुछ अच्छा नहीं लग रहा है। वॉशरूम से होकर आती हूं मैं” अपना बैग सुमन को थमाते हुए मानसी ने कहा।

“रुक-रुक यह क्या” सुमन ने उसकी स्कर्ट पर लाल धब्बा देखकर पूछा तो मानसी रोने लगी।

“मां वो लाल धब्बा”

“बेटा रो क्यों रही हो, यह सब नॉर्मल होता है लड़कियों के लिए। तुम्हें बताया तो था ना मैंने”

“हां मां बताया था पर स्कूल में” कहते हुए मानसी और जोर से रोने लगी।

“अरे बेटा बताओ क्या हुआ स्कूल में बताओ मुझे”

“मां स्कूल में अचानक मुझे पीरियड आ गए, मुझे पता ही नहीं चला सब ने मेरा बहुत मजाक बनाया लड़कियों ने भी और लडको ने भी।”

“और तुम्हारी टीचर उन्होंने कुछ नहीं कहा?”

“कहा मम्मा उन्होंने उन सब को डांटा और मुझे  पैड देकर कहा कि मैं घर चली जाऊं, मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है बहुत बुरा लग रहा है। मैं कल स्कूल नहीं जाऊंगी”

“मनु मनु  रोते नहीं पहले चुप हो जाओ, देखो मनु यह जीवन है और हर इंसान के जीवन में कई पड़ाव आते हैं जैसे अब तक तुम्हारा बचपन था अब तुम अपने जीवन के दूसरे पड़ाव में कदम रख रही हो।

बेटा जीवन में ऐसे कई मौके आते हैं जब चीजें हमारे विपरीत होती हैं पर इसका मतलब यह नहीं होता कि हम उससे भाग जाए। हमें उनका सामना करना होता है और तुमने गलत क्या किया है क्यों डर रही हो? ना तुमने कुछ गलत किया है ना तुमसे कुछ गलत हुआ है। स्त्री के जीवन का यह एक अमित सत्य है जो हमारे जीवन का हिस्सा है। या यूं कहो गौरव है स्त्री के जीवन का। एक नारी का संपूर्ण जीवन इसी पर आधारित होता है। पूरी तरह से प्राकृतिक है यह। हमारा इस पर कोई बस नहीं होता। इसलिए पीरियड्स को लेकर किसी भी तरह का अपराध बोध महसूस करने की जरूरत नहीं है। अगर यह ना हो तो स्त्री कभी भी एक जीव को जन्म नहीं दे सकती।

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सामना करो उन सबका जिन्होंने तुम्हारा मजाक बनाया है, कमजोर नहीं हो तुम, हिम्मत दिखाओ और बताओ उन्हें किस चीज पर हंस रहे हैं वह। वह लड़कियां जो तुम पर हंस रही हैं उन्हें बताओ यह उनके साथ भी होता है और बहुत नॉर्मल है। और वह लड़के जो तुम पर हंस रहे हैं उनसे कहो कि अगर यह ना होता तो उनका जन्म भी ना होता। इसलिए बेटा आंसू पोछो और खुश रहो। हां अगर किसी और तरह की कोई तकलीफ हो, कहीं दर्द हो तो बताओ मुझे।”

“नहीं मां दर्द नहीं है, समझ गई हूं मैं कि ये लाल धब्बा हमारे जीवन का अभिशाप नहीं वरदान है। आपकी बेटी हूं मैं सामना करूंगी मैं सबका और जरूर जाऊंगी स्कूल…”

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नीरजा तिवारी

शब्दों के सागर से मोती चुन,उन्हें भावनाओं में पीरोती हूँ...
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