लोकसभा चुनाव में कब किस नेता ने तोड़ी भाषा की मर्यादा

बेबाक इंडिया, अंशु रंजन, दिल्ली:  लोकसभा चुनाव (Loksabha Chunav)  में कब किस नेता ने तोड़ी भाषा की मर्यादा

“वाह रे सियासत वाह रे तेरी माया इस चुनाव में तुने कैसा कैसा रंग दिखाया।

चुनाव आयोग तेल लेने, सुप्रीम कोर्ट को तो वकील देख लेंगे। चुनाव का समय है , अभी तो सियासत की रोटियां सेकनी है “।

ये हिंदुस्तान की सियासत है बाबू, यहां वोट (Loksabha Chunav) के लिए हिंदू मुस्लामन तो करेंगे हीं जिसे जो करना है कर ले डरता कौन है आखिर हैं तो नेता ही। विकास की बात से क्या होगा, वोट ध्रुवी करण करने सी मिलेगा, तो विकास को पूछता कौन है। रोजगार गया तेल लेने, शिक्षा गई घास चरने, गरीब की दवाई गई कुड़े में, बेरोजगारी गई पकौड़ा तलने तो चिंता किसे है देश में क्या हो रहा है चिंता तो वोट की है जिसे हर हाल में बचाना चाहें इसके लिए जो करना पड़े।

याद कीजिए किस तरह झरखंड में भूख से लोगों की जान गई थी, जोर डालिए अपने जेहन पर किस तरह से ओडिशा में एंबुलेंस नहीं मिलने से दीना मांझी को अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लादकर 10 किलोमीटर तक चलकर जाना पड़ा था तो जरा यह भी याद कर लिजिए जिस देश में इंसानो को एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई जाती, उसी देश वहा गाय के लिए एंबुलेंस मुहैया कराई जाती है। कराई क्यों भी ना जाय आखिर गाय के नाम पर फिर वोट कैसे मिलेंगे।

देश को नेताओं को बस सियासत चमकाने से मतलब है गरीब की चिंता किसे है, देश के सियासतदांओं का बस चले तो अपने मतलब के लिए जनता को जाती धर्म दलित महादलित में बाट दें।

इस जैसे नेताओं की फैरिसत बहुत लंबी है

अपने जेहन पर जोर डालिए पहले चरण के चुनाव (Loksabha Chunav) से पहले देवबंद की रैली बसपा सुप्रीमों मायावती का भाषण, जिसमें कह रही है देश के मुस्लिम एक हो कर महागठबंधन को वोट करें।

थोड़ा और आगे बढ़िए, यूपी के मुखिया श्री श्री योगी आदित्यानाथ जी वो इन सब में पिछे कैसे रह जाते जो खुद हिंदुओं के सबसे परोधा घोषित कर के हि चैन लैंगे याद किजिए किस तरह से अपने भाषण में अली और बजरंग बली को ले आए थे।

अभी इनपे चुनाव आयोग का डंडा चला ही था कि रही सही कसर कांग्रेस के बडबोले नेता नवजोत सिंह सिद्धू चुनावी सभा में विवादित भाषण देने के मामले में इन सब से आगे निगल गए, सिद्धू ने ऐसी ताली ठोकी की पूरा देश हिल गया , नवजोत सिंह सिद्धू ने बिहार के कटिहार में मंगलवार को चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुसलमानों से कहा था ‘यहां अल्पसंख्यक बहुसंख्यक में है। अगर तुम लोग एकजुट होकर वोट डाला तो सब पलट जाएगा मोदी सलट जाएगा छक्का लग जाएगा।

हद तो तब हो गई जाब रामपुर से समाज वाद का झंड़ा बुलंद करने वाले आजम खान ने तो सरी हदे पार कर दी जनाब ने तो महिलाओं की अंत वस्त्र का रंग ही बताने लगे, जिसे लोकर कोहराम भी कुब हुआ, जब चुनाव आयोग का डड़ा चला तो कहते मुस्लिम होने का डंड मिला है।

इस लोकसभा चुनाव (Loksabha Chunav) में चुनाव आयोग मानो बीना दांत वाला हाथी हो गया है, करे तो करे क्या कहे तो कहें क्या, आखिर चुनाव आयोग ही है कोई टी एन सेशन थोडे ना जिसे नेता डर जाए , अब देश की जनता भी कहने लगी है । चुनाव आयोग हम शर्मिंदा है तेरे सामने लोकतंत्र आधा जिंदा है।

बाबू यह चुनाव है विश्व के सबसे बडे लोकतात्रिक देश का, यह कोई सर्कस नहीं यहां का शो 3 घंटे नही 2 महीने चलेगा और देखते जाइए कैस कैसे रंग दिखाएगा । आखिर इसी का नाम सियासत है जहा काम भी नफा नुकास देख कर किया जाता।

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