इन्दिरा गाँधी कला केंद्र में हुआ संस्कृति संवाद श्रृखला का आयोजन

महेंद्र कुमार-युवा पत्रकार, नई दिल्ली।।इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने 21 अप्रैल 2018 को संस्कृति संवाद श्रृखला का आयोजन किया। यह आयोजन कलाऋषि बाबा योगेन्द्र  के सम्मान मे आयोजित किया गया।

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने 21 अप्रैल 2018 को संस्कृति संवाद श्रृखला का आयोजन किया

इस अवसर पर बाबा द्वारा लिखी पुस्तक कला साधना के वट वृक्ष का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ,दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी, और लोकगीत गायिका मालिनी अवस्थी जैसे हस्तियां कार्यक्रम का हिस्सा रहें। बाबा योगेंद्र का जीवन अंनुभवों की पुस्तक हैं। वह समाज को मनावत से जोड़ने के लिये तत्पर रहते हैं।

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने 21 अप्रैल 2018 को संस्कृति संवाद श्रृखला का आयोजन किया

उनसे मिलने वाले लोग उन से हर मुलाकात में कुछ न कुछ नया सीखते है। बाबा भारतीय समाज में समरसता को बढ़ाने मे अपनी अहम् भूमिका निभा रहे है। बाबा ने कहा कि कला मिटी मे प्रांण फूंकती हैं।कला संस्कारो का सृजन करती है। कला ने समय-समय पर हताश हुए देश को जगाने मे अपनी अहम भूमिका निभाई है। बाबा भारतीय संस्कृति को सहेजने के जिवंत प्रतीक है। बाबा एक ऐसे प्रवासी है, जिनका हर पग देश की सांस्कृतिक चेतना को नया जीवन प्रदान करता हैं। बाबा को भारत सरकार ने उन के कार्यो के लिये पद्मश्री से अंलकृत किया है। इस मौके पर मनोज तिवारी ने कहा कि वह काशि हिन्दू विश्वविद्यालय से पढे़े है।

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने 21 अप्रैल 2018 को संस्कृति संवाद श्रृखला

संस्कार भारती ने मुझ को मंच दिया है । जिस की वजह से मेंने 90 से ज्यादा फिल्मो मे काम किया। सैकड़ो गानों को गाया, और आज दुनिया जी सबसे बइन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने 21 अप्रैल 2018 को संस्कृति संवाद श्रृखला का आयोजन ड़ी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष पद और संसद भी हुं। मैं यहाँ तक इस लिये पुहुंच पाया हूं क्योंकि मुझ को संस्कार भारती ने ऐसे संस्कार दिए। और बाबा ने मेरी बहुत मदद की। इस मौके पर बाबा का सम्मान मे मनोज तिवारी ने एक लोक गीत भी गाया। गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा  ने इस मौके पर कहा कि बाबा मेरे बड़े भाई जैसे है। आप ने अनेक लोगों को कालाकार बनाया है। भारतीय संस्कृति हमेसा जींवत रहेगी क्योकि बाबा जैसे लोग इसको जीवंत रखने में लगे हुए हैं। बाबा ने इस भारत की धरती को कला के रंग दिए है। समाज व्यक्ति को तर्क की कसौटी पर तोलता है, उस को पृथक करता है, समझता है, जानता है, फिर उसको मान सम्मान देता है।  आप को देश के युवा अपना प्ररेणा मानते है। इस अवसर पर मालनी अवस्ति ने कहा कि वो बाबा की पोती जैसी है। और बाबा के आशिर्वाद से आज यहाँ तक पहुंची है। इस अवसर पर मालनी ने बाबा के सम्मान मे एक लोक गीत भी गाया।

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