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मां मां कहां हो” वरुण खुशी से भागते हुए रेखा जी के कमरे में पहुंचा, रेखा जी के पैर छूकर वो उनके सीने से लिपट गया।

“अरे क्या हुआ बेटा क्या बात है”

“आज मैं बहुत खुश हूं मां, जानती हो अभी अभी एक कुरियर आया है मेरे ऑफिस में तीन लोगों को अमेरिका भेजा जा रहा है दो महीने के लिए, उसमें मेरा भी नाम है मां, ट्रेनिंग है और इस ट्रेनिंग के बाद प्रमोशन पक्की।”

“यह तो बहुत खुशी की बात है बेटा, पर तू अमेरिका चला जाएगा”

“दो महीने की ही तो बात है ना मां, अच्छा चलता हूं पैकिंग भी तो करनी है कल ही निकलना है”

उधर नेहा को जब से यह खबर मिली है उसके आंसू थम ही नहीं रहे हैं वह वरुण के लिए खुश है लेकिन वरुण से जुदाई के बारे में सोच सोच कर उसका दिल बैठा जा रहा है।
“क्यों रो रही हो मेरी जान दो महीने की तो बात है यह केवल मेरे लिए ही नहीं हमारे लिए हैं हमारे भविष्य के लिए है”
“जानती हूं वरूण पर तुम्हारे बिना अकेले” (इतना कहते ही नेहा फूट-फूट कर रोने लगी)

“तुम्हारे बिना मैं भी तो अकेला हो जाऊंगा ना” ( रुंधे हुए गले से वरुण ने कहा तो दोनों एक दूसरे के गले लग कर रो दिए, वरूण चाहता तो नेहा को अपने साथ लेकर जा सकता था लेकिन कुछ सोचकर नहीं ले जा रहा था)

अगले दिन वरुण चला गया। नेहा अपने ससुराल में थी। सास-ससुर, ननद के होते हुए भी वह अकेला महसूस कर रही थी। वरुण की याद उसे हर पल सताती पर वरुण की सीख भी उसे याद थी इसलिए सबको अपना बनाने की कोशिश में जी-जान से लगी हुई थी। पर उसके चेहरे की उदासी से घर का हर सदस्य वाकिफ था।

रेखा जी जब नेहा को देखती उन्हें अपना अतीत याद आ जाता। कैसे पति से दूर उन्होंने परिवार के लिए अपने हर सुख का बलिदान कर दिया था। कैसे चाह कर भी उन्हें कभी मुकुंद जी का साथ नसीब नहीं हुआ। उनकी सासू मां हमेशा उन पर हावी रही। नेहा के उदास चेहरे में वह अपना चेहरा देखने लगी। उन्होंने नेहा को रोकना टोकना कम कर दिया था।

दूसरी तरफ नेहा की मुस्कुराहट वरूण के साथ ही चली गई थी। कभी वरुण की या अपनी मां की याद आती तो नेहा अकेले में रो लेती थी। और जब नहीं रहा जाता तो वरूण से बात कर लेती।

“हेलो क्या हो रहा है मेरी जान”

“कुछ नहीं तुम बताओ कैसे हो?”

“मै ठीक हूं पहले यह बताओ तुम्हें क्या हुआ है आवाज क्यों भारी है”
“कुछ तो नहीं”
“कुछ तो”
” कुछ नहीं बस मां और तुम्हारी याद आ रही है”
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“अरे मेरी जान… देखो मैं तो आ नहीं सकता अभी एक महीना और इंतजार करना होगा तुम्हें और रही मां की बात. जब आऊंगा तो ले चलूंगा तुम्हें।और यहां पर भी तो एक मां है ना उनके पास जाओ अच्छा लगेगा।”

“पर वरुण”

“पर कुछ नहीं नेहा अच्छा लगेगा मेरी कसम है जाओ, अगर अच्छा नहीं लगा तो फिर कभी नहीं कहूंगा”

“अच्छा ठीक है जाती हूं” नेहा ने  कहा तो दोनों ने फोन रख दिया। और नेहा ने चुपचाप जाकर रेखा जी की गोद में अपना सर रख दिया। रेखा जी एक बार तो हड़बड़ा गई, नेहा से उन्हें इस तरह की कोई उम्मीद नहीं थी लेकिन खुद को संभालते हुए उन्होंने नेहा के सर पर ममता भरा हाथ रखते हुए पूछा
“क्या हुआ बेटा कोई परेशानी है, कोई दिक्कत है?”

“नहीं मां बस मां की याद आ रही थी” नेहा ने सुबकते हुए कहा।
“हां बेटा शादी के बाद मां की याद तो आती ही है मैं यह नहीं कह सकती कि अपनी मां को भूल जाओ, पर मैं हूं ना इतना कहकर काफी देर तक वह नेहा के सर को सहलाती रही। यह सब देखकर मुकुंद जी बहुत खुश थे.नेहा के जाने के बाद मुकुंद जी ने रेखा जी से कहा “देखो मैं ना कहता था जरूरी नहीं जो कुछ तुमने सहा वो हमारी बहू भी सहे। अच्छा लगता है जब वरुण उसका साथ देता है। जो करने की हिम्मत मैं कभी नहीं जुटा पाया वह मेरा बेटा कर रहा है और सच बताना क्या तुम्हें अच्छा नहीं लगा।”
“सच कह रहे हैं आप, वो बहू है हमारे घर का हिस्सा है, बच्ची है अभी। अपना घर छोड़कर हमारे घर आई है और अब हमारा फर्ज बनता है कि हम इस घर को उसका घर बनाएं।” रेखा जी ने कहा।

धीरे-धीरे ही सही नेहा और रेखा जी एक दूसरे के करीब आ रही थी और एक दिन किचन में काम कर रही नेहा पर रेखा जी की नजर पड़ी, नेहा पूरी तल्लीनता से किचन में काम करने में जुटी हुई थी और साथ-साथ अपने सर के पल्लू को संभालती। काफी देर तक रेखा जी ने यूं ही देखती रही और फिर मन ही मन एक फैसला किया। नेहा के सामने गई और कहा-

“बेटा यह पल्लू हटा दो सर से”

नेहा एकदम चौक गई।

“सही सुना तुमने हटा दो कोई जरूरत नहीं है पल्लू करने की, घर है तुम्हारा जैसे चाहो वैसे रहो।” रेखा जी ने कहा तो नेहा झट से उनके गले से लग गई और कहा-

“मां आज आपने सच में इस घर को मेरा घर बना दिया है थैक्यूं मां।”
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नेहा को लगा जैसे उसकी और वरूण की मन की मुराद पूरी हो गई है सही मायने में आज उसे उसका परिवार मिला है सासू मां के रूप में मां, ससुर के रूप में पिता, बहन के रूप में तनु और वरुण के रूप में एक ऐसा जीवन साथी जो जिंदगी के हर पड़ाव पर उसके साथ हैं आज नेहा को समझ आ गया था कि वरुण उसे क्यों लेकर नहीं गया क्योंकि वरुण चाहता था नेहा कुछ वक्त अकेले परिवार के साथ बिताए ताकि उनके करीब आ सके। आज वो खुद पर गर्व महसूस कर रही है कि वह इस परिवार का हिस्सा है।

दोस्तों आखिर वरुण और नेहा की समझदारी से नेहा को उसका घर मिल ही गया। आपको मेरी कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा और मेरी और कहानियों को पढ़ने के लिए मुझे फॉलो कीजिएगा।
डिस्क्लेमर:- इस पोस्ट में व्यक्त किए गए विचार लेखिका ‘नीरजा तिवारी’ के व्यक्तिगत राय हैं। ज़रूरी नहीं कि वे विचार या राय bebaakindia.com के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों। कोई भी चूक या त्रुटियां लेखिका की हैं और bebaakindia.com की उसके लिए कोई दायित्व या ज़िम्मेदारी नहीं है।

By bebaak

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