aadhar card
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आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने किसी भी सेवा का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आधार नंबर समेत अन्य निजी जानकारी साझा करते वक्त सावधानी बरतने की बात कहती है। यूआईडीएआई (UIDAI) ने गूगल पर मेरा आधार, मेरी पहचान सर्च करने पर कथित तौर पर आधार की पीडीएफ फाइल खुलने संबंधी रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है। उसने दावा किया कि यह आधार और इसके डाटाबेस की सुरक्षा से छेड़छाड़ का मुद्दा नहीं है।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने कहा कि जब लोग किसी सेवा प्रदाता या वेंडर से सेवा प्राप्त करने के लिए इंटरनेट पर आधार समेत अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करते हैं तो इंटरनेट पर जानकारी डालते समय उन्हें सावधानियां बरतनी चाहिए। आधार पहचान प्रणाली की मजबूती पर जोर देते हुए यूआईडीएआई (UIDAI) ने कहा कि कुछ बेईमान लोग दूसरों का आधार कार्ड पोस्ट या प्रकाशित कर देते हैं, लेकिन इसका यूआईएडीएआई और आधार की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ता है। बयान में कहा गया है कि ये रिपोर्टें हकीकत से बहुत दूर हैं और आधार की सुरक्षा और उसके डेटाबेस से इसका कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि कोई भी आधार कार्ड यूआईडीएआई (UIDAI) के डेटाबेस से नहीं लिया गया है। संस्था ने जोर देते हुए कहा कि अन्य पहचान पत्र की तरह ही आधार भी गोपनीय दस्तावेज नहीं है।

 यूआईडीएआई (UIDAI) ने तर्क दिया है कि किसी के आधार कार्ड के बारे में थोड़ी सी जानकारी होना उस शख्स की पहचान के साथ छेड़छाड़ करके नई पहचान स्थापित करने के लिए काफी नहीं है, क्योंकि इसके लिए बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण की जरूरत होती है। मोबाइल नंबर, बैंक खाता संख्या, स्थायी खाता संख्या (पैन कार्ड), पासपोर्ट, परिवार से जुड़ी जानकारियों इत्यादि की तरह ही आधार को भी व्यक्तिगत जानकारी माना जाना चाहिए। किसी व्यक्ति की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए आधार को भी संरक्षित किया जाना चाहिए। बयान में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी और व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाता, फोटो इत्यादि अनाधिकृत तौर पर प्रकाशित करता है तो संबंधित व्यक्ति उस शख्स के खिलाफ क्षतिपूर्ति का मुकदमा कर सकता है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि इस तरह का प्रकाशन आधार और उसके डेटाबेस को प्रभावित नहीं करते हैं।