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बड़े पर्दे पर एक मुस्कुराता, खिलखिलाता चेहरा जिसे देखने के बाद हज़ारों दिलों की धड़कन थम जाती है। पर्दे पर जिसके हंसने पर हम हंसते हैं, रोने पर रोते हैं, उदास होने पर उदास हो जाते हैं। जो अपनी अदाकारी से हमारे दिलों पर ऐसी छाप छोड़ता है कि उसे हम अपना कहने लगते हैं।
मेरा फेवरेट हीरो, मेरी फेवरेट हीरोइन, मेरा रोल मॉडल, मुझे उसके जैसा बनना है, मुझे उस मुकाम पर पहुंचना है जहां आज वह है, लाखों करोड़ों लोगों का अपना बन जाता है वह चेहरा। दूर बहुत दूर से देखते हैं हम उसे। सितारों के बीच चमचमाहट में एक चमकता चांद सा दिखता है वह चेहरा। जिसकी ख्वाहिश तो सब करते हैं पर उसे छू कोई-कोई ही पाता है।
सुशांत सिंह राजपूत सितारों की दुनिया में एक ऐसा ही चांद था जो दूर से देखने पर बहुत खूबसूरत नजर आता है लेकिन सितारों के बीच वो अकेला ही था। जो ना जाने किस मानसिक यातना से गुजर रहा था। जिसके चलते उसे जिंदगी गवानी पड़ी।
फ़िल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की ‘कथित खुदकुशी’ की पहेली सुलझने के बजाय लगातार उलझती हुई दिख रही है।
राजनीतिक नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप, सीबीआई जांच की मांग, दुखी पिता का एफ़आईआर और इंसाफ़ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुशांत की बहन की चिट्ठी, सुशांत की मौत के इस मामले में हर गुज़रते दिन के साथ एक नया एंगल सामने आ जाता है।
और बात यहीं ख़त्म नहीं होती। मौत के इस मामले की जांच कौन करेगा, इस सवाल को लेकर भी दो राज्यों की पुलिस आमने-सामने खड़ी दिखी।
हालांकि बिहार सरकार ने परिवार की सीबीआई जांच कराने की मांग मान ली है और इस सिलसिले में सिफारिश कर दी गई थी, जो अब मान ली गई है। अब यह केस सीबीआई के हाथों में है।

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यह मामला पूरी तरह से अब राजनीतिक रंग ले चुका है एक तरफ जहां राजनेताओं का अलग-अलग पक्ष विपक्ष में बयान आ रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ मुंबई पुलिस और बिहार पुलिस एक दूसरे के खिलाफ खड़ी है।
बिहार विधानसभा में सुशांत के चचेरे भाई और बीजेपी के विधायक नीरज कुमार बबलू ने उनकी मौत को कत्ल का मामला बताया और इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की। इसके साथ ही विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने भी मुख्यमंत्री से सुशांत केस के मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। और ऐसा नहीं है कि केवल बिहार के राजनेता ही इस मसले पर अपनी राय दे रहें हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने पूछा है कि बिहार पुलिस के काम के मसले पर महाराष्ट्र सरकार क्यों ग़ैरज़रूरी दबाव महसूस कर रही है? ये वाकई अजीब बात है। यहां तक कि देवेंद्र फड़णवीस की पत्नी अमृता फड़णवीस ने भी कहा कि जिस तरह से सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला हैंडल किया जा रहा है, उससे ऐसा लगता है कि मुंबई ने अपनी इंसानियत खो दी है.
हालांकि देवेंद्र फड़णवीस और उनकी पत्नी के बयान पर शिवसेना की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जो लोग मुंबई पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें राज्य पुलिस की सुरक्षा छोड़ देनी चाहिए।

यह तो ही राजनेताओं की बात राजनीति की बात की जाए सुशांत राजपूत की मौत के मामले में हर राजनेता हर पार्टी एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है की बिहार की पुलिस जब मुंबई सुशांत की मौत की छानबीन करने पहुंचती है तो मुंबई पुलिस की तरफ से उसे कोई सहयोग नहीं मिलता यहां तक कि जिस तरह के वीडियो और बयान सामने आए हैं उससे यही लगता है की मुंबई पुलिस सुशांत की मौत को पूरी तरह से आत्महत्या मान कर बैठ गई है और नहीं चाहती की बिहार के पुलिस अपने तरीके से इस मामले की छानबीन करें।
जिसका ताजा उदाहरण इस मामले की जाँच के लिए पटना से मुंबई पहुंचे बिहार पुलिस के अधिकारी आईपीएस विनय तिवारी को बीएमसी की ओर से क्वारंटीन सेंटर भेज दिया जाना है जिससे बिहार पुलिस के अन्य अधिकारी मजबूरी में छिप रहे हैं।

इन्हीं वजहों से सुशांत की मौत के मामले में परिवार, बिहार सरकार के साथ साथ ही सुशांत के फैंस भी यही चाहते थे कि इसकी जांच सीबीआई को सौंपी जाए जो अब मान ली गई है सुशांत के केस को अब सीबीआई को सौंप दिया गया है। आगे की जांच सीबीआई ही करेगी लेकिन सवाल ये है कि इस मामले में अबतक जो भी तथ्य और बयान सामने आयें हैं उसके बाद अगर सुशांत की मौत के लगभग पचास दिन के बाद अगर सीबीआई जांच करती है तो क्या सच कभी सामने आ पाएगा? अगर सुशांत की मौत एक आत्महत्या है तो क्या आत्महत्या की वजह कभी सामने आ पाएगी और अगर यह हत्या है तो इन पचास दिनों में प्रारंभिक सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो चुकी होगी क्या सीबीआई पर्याप्त मात्रा में सबूत इकट्ठे कर पाएगी और दोषियों को सजा दिलवा पाएगी वो भी ऐसी स्थिति में जब वहां की सरकार किसी भी कीमत पर यह केस सीबीआई को नहीं सौंपना चाहती? क्या सीबीआई को मुंबई पुलिस से सहयोग मिलेगा या बिहार पुलिस की तरह केवल भटकाव? क्या सुशांत का केस भी सुशांत के चाहने वालों के लिए दिव्या भारती के केस की तरह ही उलझ कर रह जाएगा, या मिल पाएगा न्याय जिसका इंतजार ना केवल परिवार बल्कि उसके लाखों फैन्स भी कर रहे है?
ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिसके जवाब के इंतजार में लाखों लोग हैं।

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नीरजा तिवारी

By नीरजा तिवारी

शब्दों के सागर से मोती चुन,उन्हें भावनाओं में पीरोती हूँ...

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