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कोरोना वायरस से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ में आदिवासी पहन रहे पत्तों से बना मास्क

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देशभर में फैल रहे कोरोना वायरस से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ में बस्तर ज़िले के कई इलाकों में आदिवासियों ने ‘सरई’ के पत्तों का मास्क बनाकर उसका उपयोग करना शुरू कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कांकेर ज़िले के अंतागढ़ के कुछ गांवों में बुलाई गई बैठक में आदिवासी पत्तों से बनाया हुआ मास्क पहनकर पहुंचे। भर्रीटोला गांव के एक शख्स ने बताया है, “कोरोना के बारे में गांव के लोगों ने सुना तो दहशत में आ गए। हमारे पास कोई और उपाय नहीं था। गांव वालों के पास तो मास्क है नहीं। इसलिए हमारे गांव के लोग अगर घरों से बाहर निकल रहे हैं तो वे सरई के पत्तों वाले मास्क का उपयोग कर रहे हैं।”

गांव के एक अन्य शख्स ने बताया, “हमें कोरोना वायरस की जानकारी मिली तो लगा कि खुद ही उपाय करना पड़ेगा क्योंकि गांव से आसपास के सारे इलाके बहुत दूर हैं। इसके अलावा इस माओवाद प्रभावित इलाके में आना-जाना भी बहुत आसान नहीं है।”

इस मामले को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के मास्क एक हद तक तो बचाव करते हैं लेकिन इसमें सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है। डॉक्टरों ने कहा, “आदिवासी समाज बरसों की अपनी परंपरा और ज्ञान से हम सबको समृद्ध करता रहा है। उनका पारंपरिक ज्ञान हमेशा चकित कर देता है, लेकिन कोरोना के मामले में बेहतर है कि वे भी देश के दूसरे नागरिकों की तरह अपने-अपने घरों में रहें।”

डॉक्टरों ने कहा है कि जरुरी हो तो सरकार को चाहिए कि वह आदिवासी इलाकों में कपड़ों से बने मास्क का मुफ्त वितरण करे, जिसे धोकर बार-बार उपयोग किया जा सके।”

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा, “लोगों ने स्वयं ऐसा किया होगा, मुझे ऐसा नहीं लगता। किसी एनजीओ या सामाजिक संगठन ने ऐसी पहल की होगी। वैसे मुझे लगता है कि किसी ने मास्क की कमी को दर्शाने के लिये पहल की होगी।”

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